कोरबा, करतला: “जिला व जनपद के प्रशासनिक अधिकारियों और उच्च जनप्रतिनिधियों के पीछे बैठकर सरपंच मस्त कूलर की ठंडी हवा का आनंद लेते नजर आए, जबकि गांव के ग्रामीण उनकी एक झलक पाने के लिए दर-दर भटकते रहे।
हैरानी की बात तो यह है कि ऐसे लापरवाह सरपंच को समझाने के बजाय क्षेत्र के उच्च जनप्रतिनिधि खुद उन्हें संरक्षण देते हुए अपने पीछे बैठाए रखे हैं।”कोरबा जिले के जनपद पंचायत करतला अंतर्गत सरगबुंदिया गांव में इन दिनों सरपंच के खिलाफ विरोध चरम पर पहुंच चुका है। पिछले 4 दिनों से ग्रामीण सरपंच के घर के बाहर डटे हुए हैं ,रात 11 बजे तक इंतजार, लेकिन सरपंच अब तक सामने नहीं आए।
ग्राम सभा और पंचायत बैठकों को लेकर गंभीर लापरवाही एवं भर्राशाही तरीके से कार्य करने का आरोप ग्रामीणों ने लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर सरपंच अश्वनी सिंह तंवर कनकी में आयोजित सुशासन तिहार शिविर कार्यक्रम में व्यस्त नजर आए,
जहां वे प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच मौजूद रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि “हम यहां अगरबत्ती लेकर सरपंच को ढूंढ रहे हैं, लेकिन सरपंच देवता दर्शन देने को तैयार नहीं!”
सबसे बड़ा सवाल—
गांव में सुशासन तिहार की मुनादी क्यों नहीं कराई गई?
क्या सरपंच को डर था कि ग्रामीण शिकायत लेकर कार्यक्रम में पहुंच जाएंगे?
आखिर सरपंच जनता से दूरी क्यों बना रहे हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जानबूझकर अंधेरे में रखा गया, जबकि सरपंच उजाले में फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहे।
अब मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि भरोसे के टूटने का है। अगर जल्द जवाब नहीं मिला, तो यह विरोध और उग्र हो सकता है।
