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कोरबा। जिले के कोरबा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पतरापाली में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की हकीकत चौंकाने वाली है। यहां कागजों में आवासों को पूर्ण दिखा दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई मकान आज भी अधूरे पड़े हैं। हालत यह है कि कुछ निर्माण इतने पुराने और जर्जर हो चुके हैं कि पूरा होने से पहले ही ढहने की कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि जब मकान बन ही नहीं पा रहे, तो गरीबों को योजना का लाभ आखिर कैसे मिलेगा?

ग्रामीणों का कहना है कि आवास मित्र किसी तरह हितग्राहियों को मकान पूरा कराने के लिए घर-घर पहुंच रहे हैं, मिन्नतें भी कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते लोग निर्माण आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं।

पशु शेड निर्माण में भी गड़बड़ी का आरोपइसी पंचायत के आश्रित गांवों से पशु शेड निर्माण में भारी लापरवाही का मामला भी सामने आया है। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर रोजगार सहायक राजू राठिया पर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य जनपद के कर्मचारियों के साथ मिलकर कराया जाता है, लेकिन हितग्राहियों को यह तक नहीं बताया जाता कि उनके खाते में कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं—कई पशु शेड बिना प्लास्टर के अधूरे हैं

अधिकांश जगहों पर कोटिंग (कोटना) नहीं की गईअधूरे निर्माण के बावजूद जियोटैगिंग कर दी गई

मनरेगा भुगतान में भी लापरवाही

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत किए गए कार्यों का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। कई मजदूरों का पैसा अटका हुआ है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। रोजगार सहायक की कार्यशैली को लेकर गांव में लगातार संदेह और नाराजगी बढ़ रही है।

जवाब से बचते नजर आए जिम्मेदार

जब इस मामले में रोजगार सहायक राजू राठिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने खुद को व्यस्त बताते हुए बातचीत से बचने की कोशिश की। इससे उनकी कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच हुई तो खुलेंगे कई राज!

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पंचायत में जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए, तो कई परतों में छिपा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। वनांचल क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही से भोले-भाले ग्रामीणों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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