0 1 min 3 dys

कोरबा जिले के ग्राम पंचायत पहंदा में आयोजित सुशासन तिहार 2026 का जनसमस्या निवारण शिविर एक तरफ जहां शासन की योजनाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने का माध्यम बना, वहीं दूसरी ओर कई विभागों की लापरवाही भी खुलकर सामने आ गई। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक शिविर में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी रही। बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं और आवेदन लेकर पहुंचे, जिससे साफ संकेत मिला कि अब भी कई ग्रामीण शासन की मूलभूत योजनाओं से वंचित हैं।

शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत कोरबा अध्यक्ष बिजमोती राठिया एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुषमा कमलेश अनंत मौजूद रहीं। साथ ही जनपद सदस्य किशन कोशले, कृष्णा राजपूत, विधायक प्रतिनिधि दशरथ खड़िया, भाजपा उरगा मंडल अध्यक्ष किशन साव, एसडीएम सरोज महिलांगे, जनपद पंचायत सीईओ खगेश निर्मलकर सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

राजस्व, पंचायत, खाद्य, स्वास्थ्य, पीएचई, विद्युत समेत विभिन्न विभागों ने शिविर में स्टॉल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। पीएम आवास, महतारी वंदन योजना, राशन कार्ड, श्रम कार्ड, पेंशन और राजस्व मामलों से जुड़े आवेदन मौके पर लिए गए और कई मामलों का तत्काल निराकरण भी किया गया।

शिविर के दौरान जिन हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 90 दिनों के भीतर अपना आवास पूर्ण कर लिया था, उन्हें प्रतीकात्मक रूप से चाबी सौंपकर सम्मानित किया गया। वहीं एक दिव्यांग युवक को तत्काल व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई, जिससे प्रशासन की संवेदनशीलता देखने को मिली। देवरमाल गांव के ग्रामीणों को राशन कार्ड वितरित किए गए।

सुबह से शाम तक लगातार अधिकारी और कर्मचारी ग्रामीणों की समस्याएं सुनते रहे। बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने धैर्यपूर्वक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया।

ग्रामीणों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी, जिससे शिविर में पहुंचे लोगों को राहत मिली। लेकिन भीड़ और शिकायतों की संख्या ने कई सवाल भी खड़े कर दिए।

जनप्रतिनिधियो एवं ग्रामीणों ने खाद्य विभाग, पीएचई विभाग और विद्युत विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए। कई लोगों ने पेयजल, बिजली और राशन संबंधी समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। स्कूलों में शौचालय नहीं होने का मुद्दा भी शिविर में प्रमुखता से उठा।

इसी दौरान सहकारिता विभाग से जुड़े किसानों ने धान खरीदी केंद्रों में धरम कांटा लगाने की मांग उठाई। किसानों और केंद्र प्रबंधकों का कहना था कि धान परिदान के समय मिलरों के साथ विवाद की स्थिति में किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में जिला खनिज न्यास मद से धरम कांटा की व्यवस्था की जानी चाहिए।

सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रहा है और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अन्य ग्रामीणों ने भी शिविर में पहुंचकर शासन की इस पहल की सराहना की।

लेकिन अब सवाल यही है कि सुशासन तिहार के इन शिविरों में उठ रही समस्याओं का स्थायी समाधान आखिर कब तक होगा? क्या प्रशासन विभागों की किरकिरी रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर शिविर सिर्फ आवेदन लेने तक सीमित रह जाएंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *