जांजगीर-चाम्पा। जिले में दिव्यांगजनों के लिए आयोजित निःशुल्क सहायक उपकरण वितरण शिविर के बीच प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है।
विकासखंड बम्हनीडीह में 30 अप्रैल को प्रस्तावित मूल्यांकन शिविर बिना पूर्व सूचना के स्थगित कर दिया गया, जिससे 10 से 12 दिव्यांगजन शिविर स्थल पहुंचकर भटकते रहे।दूर-दराज से आए इन दिव्यांगजनों को न तो शिविर की जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था की गई, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना ने समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है। ग्राम पोडीकला (दारंग) निवासी राजेश कुमार कश्यप, जो लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं, पिछले लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल के लिए भटक रहे हैं।
दस्तावेजो के अनुसार, राजेश कुमार ने 28 नवंबर 2024 को जन समस्या निवारण शिविर, सरहर में आवेदन दिया, इसके बाद 2 फरवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन, जांजगीर-चाम्पा में भी आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन आज तक उन्हें नई इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल उपलब्ध नहीं कराई गई।
मामला यहीं नहीं थमता। इस संबंध में डॉ. चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा ने भी 10 मार्च 2026 को कलेक्टर को पत्र लिखकर राजेश कुमार को शीघ्र नई इलेक्ट्रॉनिक ट्राइसाइकिल प्रदान करने के निर्देश देने का अनुरोध किया था। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट उल्लेख किया कि प्रार्थी 90 प्रतिशत दिव्यांग है और उसकी पुरानी ट्राइसाइकिल पूरी तरह जर्जर व अनुपयोगी हो चुकी है।
इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। एक ओर जहां शासन द्वारा दिव्यांगजनों के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पात्र हितग्राही वर्षों से बुनियादी सुविधा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों और परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इतने आवेदन और जनप्रतिनिधि की सिफारिश के बाद भी क्या प्रशासन जागेगा या फिर दिव्यांगजनों की परेशानी यूं ही जारी रहेगी।

Sab sata ka khel hai
Sab k sab madarchod hai
Koi nahi jo hamare haque ko dila sake