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छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल की दोपहर एक भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाका इतना तेज था कि प्लांट परिसर के साथ-साथ आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए।

जिला प्रशासन के अनुसार इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि 22 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

हालांकि, प्लांट के कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों का दावा है कि मृतकों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उनका कहना है कि विस्फोट के समय बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे, जिससे हताहतों का आंकड़ा 40 से ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रशासन वास्तविक आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं कर रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोग अपने परिजनों को निजी वाहनों और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाते नजर आए, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जानकारों का मानना है कि बॉयलर जैसे संवेदनशील इकाइयों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन जरूरी होता है। ऐसे में इस प्रकार का बड़ा हादसा कई सवाल खड़े करता है—क्या सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई, या रखरखाव में लापरवाही बरती गई?फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं

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