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कोरबा। जनपद पंचायत करतला अंतर्गत ग्राम पंचायत सरगबुंदिया में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण पिछले चार दिनों से लगातार सरपंच के घर के सामने शाम होते ही जुट रहे हैं और रात 11 बजे तक इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरपंच उनसे मिलने सामने नहीं आ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति अब सवाल खड़े कर रही है कि आखिर सरपंच जनता से क्यों बच रहे हैं।

क्या वे किसी गलती या भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं, या फिर जानबूझकर ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं?

ग्राम सभा और बैठकों को लेकर गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

विगत 4 वर्षों में ग्राम सभा की नियमित बैठक नहीं कराई गईबिना बैठक के ही प्रस्ताव पारित किए जाने का आरोप

बैठक की तिथि बदलकर चुपचाप सीमित लोगों के साथ बैठक करना अधिकतर पंचों और ग्रामीणों को सूचना नहीं देना

ग्रामीणों का कहना है कि जब वे पंचायत भवन पहुंचते हैं तो “कोरम पूरा नहीं होने” का हवाला देकर बैठक स्थगित कर दी जाती है।

बैठक से पहले पंचायत भवन में ताला, फिर सरपंच गायब

दिनांक 02 मई 2026 को आयोजित बैठक में भी विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि:सरपंच और कुछ पंचों की मौजूदगी में बैठक शुरू की गई

बाकी पंचों के पहुंचने से पहले ही पंचायत भवन में ताला लगाकर सरपंच गायब हो गएबाद में संपर्क करने पर सरपंच ने “शासकीय कार्य में व्यस्त” होने की बात कहीइस घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया।

सचिव पर भी लापरवाही के आरोप

ग्राम पंचायत के सचिव प्रमोद कुमार राठिया पर भी गंभीर आरोप लगे हैं:

मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहने का आरोप बैठकों की सूचना समय पर नहीं देना

पिछले एक वर्ष से लगातार बैठक टालने और स्थगित करने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि सचिव और सरपंच की मिलीभगत से पंचायत का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों का विरोध तेज, कार्रवाई की मांगग्रामीणों ने सरपंच के “अड़ियल रवैये” के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और प्रशासन से मांग की है कि:पंचायत में हो रही अनियमितताओं की जांच कराई जाएसचिव प्रमोद कुमार राठिया को तत्काल हटाया जाएग्राम सभा की नियमित और पारदर्शी बैठक सुनिश्चित की जाए❓

सबसे बड़ा सवाल

गांव का नाम “सरगबुंदिया” भले ही हो, लेकिन वर्तमान माहौल को देखकर ग्रामीणों का कहना है कि हालात “सड़क” जैसे हो गए हैं—

अव्यवस्था और असंतोष से भरे हुए।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

👉 सरपंच आखिर ग्रामीणों के सामने आने से क्यों बच रहे हैं?

👉 क्या पंचायत में भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश हो रही है?

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